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संतान की रक्षा के लिए रखा जाता है अहोई अष्‍टमी व्रत

अहोई अष्‍टमी व्रत

कार्तिक कृष्ण पक्ष में तिथि त्योहारों की भरमार रहती है जिसमें करवा चौथ और अहोई अष्टमी पर्व महिलाओं के द्वारा किए जाने वाले विशेष दो पर्व हैं। जिनको मनाते हुए महिलाएँ जहाँ शास्त्रीय एवं लोक रीतिपूर्वक व्रत उपवास करती हैं वहीं सांस्कृतिक कार्यक्रमों द्वारा इन्हें उत्सव का रूप प्रदान करती हैं। कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर अहोई अष्टमी पर्व मनाया जा रहा है। इस बार यह तिथि 31 अक्टूबर दिन बुधवार को है। शास्त्रों के अनुसार, अहोई अष्टमी के पर्व और व्रत का संबंध माता गौरी के अहोई स्वरूप से है। इस दिन महिलाएं अहोई देवी का व्रत करती हैं ताकि उनकी संतान स्वस्थ और समृद्धि से भरपूर जीवन का आनंद ले। निसंतान महिलाएं इस दिन संतान प्राप्ति के लिए अहोई अष्टमी का व्रत करती हैं।

अहोई अष्‍टमी

अहोई अष्‍टमी का महत्‍व

उत्तर भारत में अहोई अष्‍टमी के व्रत का विशेष महत्‍व है. इसे ‘अहोई आठे’ भी कहा जाता है क्‍योंकि यह व्रत अष्टमी के दिन पड़ता है. अहोई यानी के ‘अनहोनी से बचाना’. किसी भी अमंगल या अनिष्‍ट से अपने बच्‍चों की रक्षा करने के लिए महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं. यही नहीं संतान की कामना के लिए भी यह व्रत रखा जाता है. इस दिन महिलाएं कठोर व्रत रखती हैं और पूरे दिन पानी की बूंद भी ग्रहण नहीं करती हैं. दिन भर के व्रत के बाद शाम को तारों को अर्घ्‍य दिया जाता है. हालांकि चंद्रमा के दर्शन करके भी यह व्रत पूरा किया जा सकता है, लेकिन इस दौरान चंद्रोदय काफी देर से होता है इसलिए तारों को ही अर्घ्‍य दे दिया जाता है. वैसे कई महिलाएं चंद्रोदय तक इंतजार करती हैं और चंद्रमा को अर्घ्‍य देकर ही व्रत का पारण करती हैं. मान्‍यता है कि इस व्रत के प्रताप से बच्‍चों की रक्षा होती है. साथ ही इस व्रत को संतान प्राप्‍ति के लिए सर्वोत्‍तम माना गया है.

अहोई अष्‍टमी

अहोई अष्‍टमी की पूजा विधि

– अहोई अष्टमी पर्व के दिन सबसे पहले स्‍नान कर स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण करें.
– अब घर के मंदिर में पूजा के लिए बैठें और व्रत का संकल्‍प लें.
– अब दीवार पर गेरू और चावल से अहोई माता यानी कि मां पार्वती और स्‍याहु व उसके सात पुत्रों का चित्र बनाएं. आजकल बाजार में रेडीमेड तस्‍वीर भी मिल जाती है.
– अब मां पार्वती के चित्र के सामने चावल से भरा हुआ कटोरा, मूली, सिंघाड़े और दीपक रखें.
– अब एक लोटे में पानी रखें और उसके ऊपर करवा रखें. इस करवे में भी पानी होना चाहिए. ध्‍यान रहे कि यह करवा कोई दूसरा नहीं बल्‍कि करवा चौथ में इस्‍तेमाल किया गया होना चाहिए. दीपावली के दिन इस करवे के पानी का छिड़काव पूरे घर में किया जाता है.
– अब हाथ में चावल लेकर अहोई अष्‍टमी व्रत कथा पढ़ने के बाद आरती उतारें.
– कथा पढ़ने के बाद हाथ में रखे हुए चावलों को दुपट्टे या साड़ी के पल्‍लू में बांध लें.
– शाम के समय दीवार पर बनाए गए चित्रों की पूजा करें और अहोई माता को 14 पूरियों, आठ पुओं और खीर का भोग लगाएं.
– अब माता अहोई को लाल रंग के फूल चढ़ाएं.
– अहोई अष्‍टमी व्रत की कथा पढ़ें.
– अब लोटे के पानी और चावलों से तारों को अर्घ्‍य दें.
– अब बायना निकालें. इस बायने में 14 पूरियां या मठरी और काजू होते हैं. इस बायने को घर की बड़ी स्‍त्री को सम्‍मानपूर्वक दें.
– पूजा के बाद सास या घर की बड़ी महिला के पैर छूकर उनका आशीर्वाद लें.
– अब घर के सदस्‍यों में प्रसाद बांटने के बाद अन्‍न-जल ग्रहण करें.

अष्टमी तिथि प्रारंभ: 31 अक्‍टूबर 2018 को सुबह 11 बजकर 09 मिनट से.
अष्टमी तिथि समाप्त: 01 नवंबर 2018 को सुबह 09 बजकर 10 मिनट तक.

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