जानिए मनसा देवी मंदिर हरिद्वार का इतिहास

मनसा देवी मंदिर देवी मनसा को समर्पित है। मनसा देवी को शाक्ति का एक रूप माना जाता है। मनसा देवी मंदिर देव भूमि हरिद्वार उत्तरांखड राज्य में स्थित है। यह हिमालय के दक्षिणी पर्वत श्रृंखला के शिवालिक पूर्वी शिखर पर बिल्व पर्वत के चोटी पर स्थित है। यह मंदिर बिल्व मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। मनसा देवी का यह मंदिर 51 सिद्ध पीठों तथा हरिद्वार मे पंचतीर्थ स्थलों से एक है। मनसा देवी मंदिर हरिद्वार का इतिहास भारत में एक विशेष छवि रखता हे। इस मंदिर से पूरा हरिद्वार का सुन्दर दृश्य देखा जा सकता है। यात्री इस स्थान तक पहुंच सकते है जो लगभग 3 किमी है तथा (केबल कार) रोपवे सेवा के द्वारा भी जाया जा सकता है।

मनसा देवी मंदिर हरिद्वार का इतिहास भारत में बहुत प्राचीन है यह हमें भारत के विशाल छवि के बारे में बताता हे। मनसा का अर्थ ‘इच्छा’ है जहां पर भक्त अपनी इच्छाओं की पूर्ति के लिए मनसा देवी मंदिर आते है। भक्त देवी पर प्रसाद के रूप में नारियल, फल, फुलों की माला और अगरबत्ती अर्पित करते है। मनसा देवी मंदिर हरिद्वार का इतिहास के अनुसार अगर कोई भक्त मनसा देवी से कोई इच्छा चाहता है, वह भक्त कलावा का धागा मंदिर के खम्बों या पेड पर बान्धते है फिर इच्छाओं की पूर्ति होने पर धागा खोल कर आते है।
मनसा देवी मंदिर हरिद्वार का इतिहास
मनसा देवी मंदिर हरिद्वार का इतिहास में मनसा देवी के दो मुर्तिओ के बारे में बताया गया हे, एक मूर्ति के पांच भुजा और तीन मुंह है और दूसरी के मूर्ति के आठ भुजाएं जो आठ शस्त्र के साथ है। मनसा देवी मंदिर हरिद्वार के तीन शक्ति पीठ में से एक है दो अन्य शक्ति पीठ चण्डी देवी और माया देवी है। ये तीनों मंदिर मिल कर त्रिभुज की स्थिति की रचना करते है।

मनसा देवी मंदिर हरिद्वार का इतिहास के अनुसार ऐसा माना जाता है कि मनसा देवी और चण्डी देवी ये दोनों पार्वती के दो रूप है जो एक दूसरे के करीब रहते है। ऐसा भी माना जाता है कि भगवान शंकर की मन से उभरी एक शक्ति है।

हरिद्वार में आने वाले भक्त माँ के दरबार में सिर झुकाने जरुर आते है | इस मंदिर से माँ गंगा और हरिद्वार के समतल मैदान अच्छे से दिखते है | मनसा देवी मंदिर के पास ही चंडी देवी का भी प्रसिद्द मंदिर मोजुद है |

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