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जानिए गायत्री मंत्र की उत्त्पत्ति किस तरह हुई…

गायत्री मंत्र:- ॐ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो न: प्रचोदयात्।

गायत्री मंत्र

हिन्दू धर्म में गायत्री मंत्र को सबसे बड़ा मंत्र माना जाता है | गायत्री मंत्र का वर्णन ऋग्वेद में मिलता है | सभी मन्त्रों द्वारा हम किसी न किसी देव की आराधना करते है किन्तु गायत्री मंत्र मंत्र एकमात्र ऐसा मंत्र है जिसमें हम उस परमपिता परमेश्वर से प्रार्थना करते है कि वे हमें सभी दुखों , दरिद्रता और अँधेरे से दूर कर प्रकाश की ओर ले जाये | गायत्री मंत्र का अर्थ समझने से और इस मंत्र के नियमित उच्चारण से मनुष्य ईश्वर को प्राप्त होता है | गायत्री मंत्र की उत्त्पत्ति सूर्य देव एकमात्र ऐसे देव है जो दिखाई देते है और कुछ धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गायत्री मंत्र सूर्य देव के महत्व पर प्रकाश डालता है |

गायत्री मंत्र का महत्व जीवन में तीन प्रकार के दुःख आते हैं। हमारे तीन शरीर हैं – स्थूल शरीर, सूक्ष्म शरीर और कारण शरीर। और इन सभी स्तरों में दुःख आते हैं। मानव जीवन को इन तीनों स्तरों के परे जाना है, और यही गायत्री मंत्र का अर्थ है। गायत्री मंत्र का समय के अनुसार जो इस मन्त्र का जाप करता है, वह निश्चित ही दुखों के सागर को पार कर, परम आनंद की प्राप्ति करता है।

गायत्री मंत्र की उत्त्पत्ति

गायत्री मंत्र की उत्त्पत्ति महान ऋषि विश्वामित्र की वर्षो कठिन तपस्या के बाद मानव कल्याण हेतु गायत्री मंत्र की उत्त्पत्ति हुई | माँ गायत्री को सभी वेदों की जननी भी कहा जाता है | माँ गायत्री को देवी लक्ष्मी , दुर्गा और पार्वती का ही स्वरुप माना गया है | पुराणों अनुसार गायत्री को उस परमब्रह्म शिव तत्व के समान संज्ञा दी जाती है |

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गायत्री मंत्र का समय

गायत्री मंत्र का समय शास्त्रों के अनुसार गायत्री मंत्र को वेदों का सर्वश्रेष्ठ मंत्र बताया गया है। इसके जप के लिए तीन समय बताए गए हैं। गायत्री मंत्र का जप का पहला समय है प्रात:काल, सूर्योदय से थोड़ी देर पहले मंत्र जप शुरू किया जाना चाहिए। जप सूर्योदय के पश्चात तक करना चाहिए। मंत्र जप के लिए दूसरा समय है दोपहर का। दोपहर में भी इस मंत्र का जप किया जाता है। गायत्री मंत्र का समय तीसरा समय है शाम को सूर्यास्त के कुछ देर पहले मंत्र जप शुरू करके सूर्यास्त के कुछ देर बाद तक जप करना चाहिए। इन तीन समय के अतिरिक्त यदि गायत्री मंत्र का जप करना हो तो मौन रहकर या मानसिक रूप से जप करना चाहिए। मंत्र जप तेज आवाज में नहीं करना चाहिए।

गायत्री मंत्र का अर्थ

गायत्री मंत्र का अर्थ है उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, श्रेष्ठ, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा को हम अंत:करण में धारण करें। वह परमात्मा हमारी बुद्धि को सन्मार्ग में प्रेरित करें।

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गायत्री मन्त्र का 108 बार जाप क्यों करते हैं?

क्योंकि 9 ग्रह और 12 नक्षत्र हैं। जब 9 ग्रह इन 12 नक्षत्रों के चारों ओर घूमते हैं, तो 108 प्रकार के प्रभाव डालते हैं। यदि इन प्रभावों में कुछ भी नकारात्मक होता है, तो वह इन मंत्रों की सकारात्मक ऊर्जा से सुधर जाता है।

गायत्री मंत्र के लाभ

गायत्री मंत्र के लाभ गायत्री मंत्र के नियमित जप करने से जीवन में सकारात्मक उर्जा का संचार होता है | मन शांत रहता है | घर से सभी प्रकार की पीड़ा और बाधाएं दूर होने लगती है | समाज में मान -सम्मान मिलने लगता है | चहरे पर तेज आता है | क्रोध शांत रहता है | गायत्री मंत्र के लाभ विवाह में आ रही सभी रूकावटे दूर होती है | शत्रुओं से छुटकारा मिलता है | संतान संबंधी सभी सुख मिलते है | बीमारी से छुटकारा मिलता है, कैसा भी रोग क्यों न हो गायत्री मंत्र के नियमित जप से रोगी को स्वास्थ्य लाभ अवश्य होता है | गायत्री मंत्र के लाभ विद्यार्थी द्वारा गायत्री मंत्र के जप करने से उनमें बुद्धि का विकास होता है, भूलने जैसे परेशानियां भी दूर होने लगती है और बुरी संगत से छुटकारा मिलता है |

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गायत्री मंत्र का महत्व

गायत्री मंत्र का महत्व गायत्री मंत्र का एक अनोखा स्थान है क्योंकि इसमें मंत्र और प्रार्थना दोनों की शक्ति है.गायत्री मंत्र के आध्यात्मिक और भौतिक दोनों लाभ हैं. महान सिद्धी द्वारा गायत्री साधना प्राप्त की जा सकती हैं. गायत्री धार्मिक ज्ञान का मंत्र है गायत्री मंत्र को मंत्रमुग्ध करने से वही फल पाया जाता है, जैसे चार वेदों के पाठ से पाया जाता है. गायत्री के प्रार्थना रूप में विभिन्न मंत्र हैं. गायत्री मंत्र का महत्व गायत्री मंत्र को सावित्री मंत्र के रूप में भी जाना जाता है, जिससे सूर्य की स्तुति कि जाती है. इस मंत्र का इस्तेमाल भगवान शिव की प्रार्थना के लिए किया जा सकता है जिसे रुद्र गायत्री मंत्र भी कहा जाता है…

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